यूरिया सब्सिडी के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने यूरिया सब्सिडी के लिए 30 जून 2023 को 3 लाख करोड़ रुपये की मंजूरी दी। इस सब्सिडी योजना के तहत, किसानों को यूरिया की निरंतर उपलब्धता को सुनिश्चित किया।

यूरिया की निरंतर आपूर्ति

इस सब्सिडी के तहत 45 किलोग्राम बैग की समान कीमत पर 242 रुपये प्रति बैग की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिसमे करों (Tax) और नीम कोटिंग शुल्कों को छोड़ा गया है।

यूरिया सब्सिडी योजना(Urea Subsidy Scheme) को जारी रखने की मंजूरी दी गई है, ताकि यूरिया की आपूर्ति निरंतर रहे और किसानों को इसका लाभ मिलता रहे।

तीन वर्षों के लिए यूरिया सब्सिडी

2022-23 से 2024-25 तक के लिए यूरिया सब्सिडी के लिए 3,68,676.7 करोड़ रुपये निर्धारित हुए हैं।

2023-24 के खरीफ सीजन के लिए 38,000 करोड़ रुपये की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Subsidy) भी मंजूर की गई है।

किसानों को अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत नहीं

किसानों को यूरिया खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत नहीं है, जिससे उनकी खेती की लागत कम होगी।

वर्तमान में, यूरिया की मध्य औसत रिटेल प्राइस (एमआरपी) नीम कोटिंग शुल्क और करों को छोड़कर 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम यूरिया बैग है।

यूरिया का स्वदेशी उत्पादन

जबकि इसकी वास्तविक लागत लगभग 2200 रुपये है, इस योजना को भारत सरकार (Indian government) के बजट से वित्तपोषित किया गया है।

यूरिया अनुदान योजना (Urea Subsidy Scheme) को जारी रखने से यूरिया का स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा और देश आत्मनिर्भरता की ऊंचाइयों को छुएगा।

यूरिया सब्सिडी से लाभ

बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण, पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर उर्वरक की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं।

हालांकि, भारत सरकार ने उर्वरक सब्सिडी (Fertilizer subsidy) को बढ़ाकर अपने किसानों को उर्वरक की कीमतों के वृद्धि से बचाया है।

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