बाजार में नकली आलू की पहचान कैसे करे ?

आजकल बाजार में सब्जियों को भी नकली तरीके से बेचा जा रहा है, कुछ सब्जियों को तो इंजेक्शन लगाकर बड़ा करके बेचा जा रहा है, और कुछ सब्जियां ऐसी हैं, जिनका नाम बदलकर पूरे मार्केट में बिक्री की जा रही है।

इसी प्रकार से जो लोग सब्जी बेचते हैं, वह ग्राहक के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, ऐसी इंजेक्शन लगी सब्जी और नक़ली सब्जी खाने से ग्राहक को बहुत नुकसान भी हो सकता है।

इसी तरह से आलू का भी नाम बदलकर उसे मार्केट में तेजी से बेचा जा रहा है, इन सब से हमें किस तरह से सावधान रहना है, आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बताएंगे…..

आजकल बाजार में नकली आलू को लेकर बहुत बातें की जा रही हैं, ओर नक़ली आलू की बिक्री मार्केट में बहुत तेजी से हो रही है, हेमंगिनी आलू को चंद्रमुखी आलू के नाम से ज्यादा दाम में मार्केट में बेचा जा रहा है।

नकली सामान किस तरह से बेचा जा रहा है

मार्केट में खाने पीने का सामान हो या अन्य कोई प्रोडक्ट हो उसको बहुत महंगे दाम में बेचा जा रहा है। जब दुकानदार के पास प्रोडक्ट की सप्लाई कम हो जाती है, तो वह ग्राहक को नकली और मिलावटी सामान बेचकर उनके साथ खिलवाड़ करता है।

नकली प्रोडक्ट खरीदने से आप बीमार हो सकते हैं, नकली प्रोडक्ट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसलिए सभी ग्राहकों को अच्छी तरह से देखकर सावधानीपूर्वक सामान खरीदना चाहिए। कभी-कभी ग्राहक जल्दबाजी में होता है, तो वह नकली सामान को महंगे दाम में लेकर ही चला जाता हैं।

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नकली आलू मार्केट में तेजी से बेचा जा रहा है

बाजार में नकली आलू की खबर तेजी से बढ़ रही हैं, घटिया किस्म की क्वालिटी के आलू को अच्छी क्वालिटी का बताकर मार्केट में तेजी से महंगे दामों बेचे जा रहे हैं।

सभी ग्राहक नकली आलू को असली आलू समझकर तेजी से खरीदते जा रहे हैं, ना तो यह आलू ठीक तरीके से पकता है, और ना ही इसका स्वाद अच्छा होता है।

नकली आलू को असली बनाकर बेचा जा रहा

मार्केट में हेमांगिनी या हेमलिनी आलू को चंद्रमुखी आलू के नाम से बेचा जा रहा हैं, चंद्रमुखी आलू की वैरायटी सबसे ज्यादा होती है, यह आलू बाजार में ₹50 प्रति किलो के दाम में बेचा जाता है। चंद्रमुखी आलू से हम जो भी पकवान बनाते हैं, उसको साथ बहुत ही अच्छा होता है।

हिमांगिनी आलू मार्केट में 10 या ₹12 प्रति किलो बिकता है, ना तो इसका स्वाद अच्छा होता है, और ना ही इसकी क्वालिटी अच्छी होती हैं। यह आलू गलता भी कम है, इसलिए इसकी बिक्री भी बहुत कम होती है।

इन दोनों आलू की क्वालिटी एक जैसी होती है, यह दिखने में भी एक जैसे दिखते हैं, इसीलिए दुकानदार ग्राहक को धोखे से यह आलू बेच देते हैं।

हिमांगिनी आलू क्यों पसंद नहीं है

पंजाब के कई गांव में हिमांगिनी आलू की खेती बहुत की जाती हैं, हिमांगिनी आलू को लोग इसलिए पसंद नहीं करते हैं, क्योंकि ना तो यह ठीक तरीके से पकता है, और ना ही इसका स्वाद अच्छा होता है।

हिमांगिनी आलू की बहुत अधिक पैदावार होती है

इसी प्रकार से हुगली कृषि सहकारी समिति के सदस्य बताते हैं, कि हिमांगिनी आलू मूल एक मिक्स हाइब्रिड वैरायटी है। हिमांगिनी आलू का बीज दूसरे राज्य से पंजाब में पहुंचता है। हिमांगिनी आलू की पैदावार बहुत होती है, इसीलिए किसान इसकी खेती ज्यादा करते हैं।

इसके बाद चंद्रमुखी आलू को तैयार होने पर 3 से 4 महीने लग जाते हैं, जो की 50 से 60 बोरी प्रति बीघा की उपज देता है, और हेमांगिनी आलू की खेती से 45 से 60 दिन में 90 से 95 बोरी की उपज ली जा सकती हैं।

कम समय और कम खर्चे में तैयार

हिमांगिनी आलू कम समय और कम खर्चे में तैयार हो जाते हैं। उसके बाद जालंधर के अलावा हुगली जिले के पुरशुरा और तारकेश्वर गांव में भी हेमांगिनी आलू की खेती बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है।

कैसे पहचाने असली या नकली आलू

हिमांगिनी आलू और चंद्रमुखी आलू दिखने में तो एक जैसे होते हैं, लेकिन इनकी पहचान करना मुश्किल नहीं होता है।

दोनों आलू का छिलका पतला होता है, परंतु इनका रंग अंदर से अलग प्रकार का होता है। हिमांगिनी आलू का रंग अंदर से सफेद होता है, और चंद्रमुखी आलू का रंग अंदर से मट मेला होता है।

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